विवाह मुहूर्त 2026

दिल्ली · 2026 में 59 शुभ विवाह तिथियाँ

नवंबर 2026

24

नव. 2026

मंगल
11:25 PM – 6:51 AM 24 नव. – 25 नव.
नक्षत्र
रोहिणी
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा

25

नव. 2026

बुध
6:51 AM – 6:52 AM 25 नव. – 26 नव.
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया

26

नव. 2026

गुरु
6:52 AM – 5:47 PM
नक्षत्र
मृगशिरा
तिथि
कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

दिसंबर 2026

2

दिस. 2026

बुध
10:32 AM – 6:58 AM 2 दिस. – 3 दिस.
तिथि
कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी

4

दिस. 2026

शुक्र
6:58 AM – 10:22 AM
नक्षत्र
हस्त
तिथि
कृष्ण एकादशी

5

दिस. 2026

शनि
11:48 AM – 7:00 AM 5 दिस. – 6 दिस.
नक्षत्र
स्वाति
तिथि
कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी

6

दिस. 2026

रवि
7:00 AM – 7:41 AM
नक्षत्र
स्वाति
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी

11

दिस. 2026

शुक्र
3:04 AM – 7:04 AM 12 दिस.
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
तिथि
शुक्ल तृतीया

12

दिस. 2026

शनि
7:04 AM – 3:27 AM 12 दिस. – 13 दिस.
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
तिथि
शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी

वर्ष के वर्जित काल

शुक्र अस्त

8 दिस. – 5 फ़र.

शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।

वर्जित सौर मास

16 दिस. – 14 जन.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

वर्जित सौर मास

15 मार्च – 14 अप्रै.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

अधिक मास

17 मई – 15 जून

वह अतिरिक्त चंद्रमास जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती। इसे सामान्य वर्ष से बाहर माना जाता है।

गुरु अस्त

12 जुल. – 15 अग.

गुरु का अस्त होना, सूर्य के अत्यंत निकट होने से अदृश्य। विवाह व गृह प्रवेश गुरु के उदय की प्रतीक्षा करते हैं।

वर्जित सौर मास

16 जुल. – 17 अग.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

चातुर्मास

24 जुल. – 20 नव.

देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक विष्णु का शयनकाल। इन चार मासों में विवाह व गृह प्रवेश वर्जित हैं।

वर्जित सौर मास

17 अग. – 17 सित.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

वर्जित सौर मास

17 सित. – 17 अक्टू.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

शुक्र अस्त

9 अक्टू. – 1 नव.

शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।

वर्जित सौर मास

16 दिस. – 14 जन.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

परंपरा ·विवाह की तिथियाँ द्रिक पंचांग द्वारा प्रकाशित पंचांग शुद्धि पद्धति पर आधारित हैं: सूर्योदय से सूर्योदय तक के दिन में शुभ नक्षत्र तथा योग-करण शुद्धि, वर्जित सौर मासों, चातुर्मास, अधिक मास और गुरु-शुक्र अस्त से बाहर। क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपराएँ भिन्न होती हैं, और कुलपुरोहित की सूची सदैव इनसे नहीं मिलेगी। निश्चय करने से पूर्व पुष्टि कर लें।

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