विवाह मुहूर्त 2026

Narwana · 2026 में 59 शुभ विवाह तिथियाँ

नवंबर 2026

21

नव. 2026

शनि
6:55 AM – 12:08 AM 21 नव. – 22 नव.
नक्षत्र
रेवती
तिथि
शुक्ल द्वादशी

24

नव. 2026

मंगल
11:25 PM – 6:58 AM 24 नव. – 25 नव.
नक्षत्र
रोहिणी
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा

25

नव. 2026

बुध
6:58 AM – 6:59 AM 25 नव. – 26 नव.
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया

26

नव. 2026

गुरु
6:59 AM – 5:47 PM
नक्षत्र
मृगशिरा
तिथि
कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

वर्ष के वर्जित काल

शुक्र अस्त

8 दिस. – 5 फ़र.

शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।

वर्जित सौर मास

16 दिस. – 14 जन.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

वर्जित सौर मास

15 मार्च – 14 अप्रै.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

अधिक मास

17 मई – 15 जून

वह अतिरिक्त चंद्रमास जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती। इसे सामान्य वर्ष से बाहर माना जाता है।

गुरु अस्त

12 जुल. – 15 अग.

गुरु का अस्त होना, सूर्य के अत्यंत निकट होने से अदृश्य। विवाह व गृह प्रवेश गुरु के उदय की प्रतीक्षा करते हैं।

वर्जित सौर मास

16 जुल. – 17 अग.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

चातुर्मास

24 जुल. – 20 नव.

देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक विष्णु का शयनकाल। इन चार मासों में विवाह व गृह प्रवेश वर्जित हैं।

वर्जित सौर मास

17 अग. – 17 सित.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

वर्जित सौर मास

17 सित. – 17 अक्टू.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

शुक्र अस्त

8 अक्टू. – 1 नव.

शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।

वर्जित सौर मास

16 दिस. – 14 जन.

सूर्य का धनु व मीन (खरमास) तथा कर्क से कन्या राशि तक का भ्रमण। इन सौर मासों में विवाह नहीं किए जाते।

परंपरा ·विवाह की तिथियाँ द्रिक पंचांग द्वारा प्रकाशित पंचांग शुद्धि पद्धति पर आधारित हैं: सूर्योदय से सूर्योदय तक के दिन में शुभ नक्षत्र तथा योग-करण शुद्धि, वर्जित सौर मासों, चातुर्मास, अधिक मास और गुरु-शुक्र अस्त से बाहर। क्षेत्रीय एवं पारिवारिक परंपराएँ भिन्न होती हैं, और कुलपुरोहित की सूची सदैव इनसे नहीं मिलेगी। निश्चय करने से पूर्व पुष्टि कर लें।

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