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शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
वह अतिरिक्त चंद्रमास जिसमें कोई संक्रांति नहीं पड़ती। इसे सामान्य वर्ष से बाहर माना जाता है।
गुरु का अस्त होना, सूर्य के अत्यंत निकट होने से अदृश्य। विवाह व गृह प्रवेश गुरु के उदय की प्रतीक्षा करते हैं।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
गृह प्रवेश हेतु मान्य छह अमांत चंद्रमासों — वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ व फाल्गुन — से बाहर का मास। गृह प्रवेश इन्हीं की प्रतीक्षा करता है।
शुक्र का अस्त होना। विवाह का कारक ग्रह अदृश्य है, अतः न विवाह का मुहूर्त लिया जाता है, न गृह प्रवेश का।
इनमें से कौन सी तारीख आपकी कुंडली के अनुकूल है, और क्यों
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